हे किसी सारस्वत ब्राह्मण में ताकत जो रावण की भांति एकजुट कर सके : रोहिताश सारस्वत

गुरूग्राम। आज हर वर्ग ब्राह्मणों से चिड़ा हुआ है। आखिर क्यों इसका जबाव अगर किसी से पूछा जाए तो कोई भी जबाव नहीं देता है। ब्राह्मण वर्ग भी एक दूसरे से चिड़ते हैं और एक दूसरे को एकत्रित करने की कोशिश भी करते हैं। आखिर क्यों। इसका जबाव भी लोगों को देते नहीं बनता। सवाल यह उठता है कि जब हर वर्ग चिडि़ता है और ब्राह्मण भी आपस मेंं चिड़ते हैं तो फिर एकजुट कैसे हो। एकजुट करने के लिए सारस्वत ब्राह्मण आपस में लगे हुए हैं। हां एक बात तो तय है कि त्रेता युग मेंं एक सारस्वत ब्राह्मण रावण हुआ तो एक लाख पूत सवा लाख नाति एकत्रित करके अपनी बहन की इज्जत की खातिर पूरा वंश नष्ट करा दिया। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि त्रेता युग में बहन सूपर्णखा की नाक कटने पर रावण ने अपना पूरा वंश नष्ट करा दिया। लेकिन राम के आगे झुका नहीं। अब अगर किसी सारस्वत ब्राह्मण की बहन की नाक कटती है तो वह अपनी बहन की इज्जत की खातिर दुश्मन से पंगा लेने में कतराता है। आखिर क्यों यह सवाल बारबार उठकर आते हैं। क्या इस कानून ने एक बहन की इज्जत लूटने पर सारस्वतों को इतना डरा दिया है कि वह कानून का ही सहारा लेने के लिए जाता है और आखिर उसे न्याय नहीं मिलता। जो उसकी बहन चाहती है। अब सवाल यह उठकर आता है कि उसकी बहन का भाई इतना न मर्द है कि वह अपनी बहन की इज्जत का बदला लेने के लिए बोलने के लिए तैयार होता है तो केवल कानून के नियमों में उलझा दिया जाता है। आखिर बाद में उसकी जुबान बंद कर दी जाती है। अगर किसी की बहन की इज्जत लुटती है तो सारस्वतों का इतिहास है कि वह अपनी बहन की इज्जत की खातिर वंश नष्ट कराने का, लेकिन जब ऐसी बात आती है कि इस समाज में सारस्वत ब्राह्मणों की बहन की नाक कटती है तो कोई उसका सहयोग देने की जगह उस बहन को ही कोसता है। जब कि सारस्वतों मेंं त्रेता युग में बहन की नाक काटने पर अपनी राज सिंहासन की गद्दी को भी झोंक दिया। अब अगर ऐसी बात आती है तो आखिर लोग चुप क्यों पढ़ जाते हैं। वैसे लोग एकजुट होने की बात करते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति आने पर सभी सारस्वत ब्राह्मण चुप्पी क्यों साध लेते हैं।

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