नन्हें बच्चों ने नक्सली हमले के शहीदों को दी श्रद्धाजंली

गुरुग्राम। सैनिकों की खान कहे जाने वाले अहीरवाल के पटौदी इलाके, जहां से कारगिल युद्ध में पौन 18 वर्ष के शहीद हुए बिजेंद्र सहित आठ शहीद हुए, एेसे इलाके  में सुकमा में नक्सली हमले में हुए 25 शहीदों सहित कुपवाड़ा में तीन सैनिकों के बलिदान के बाद भी जहां लोगों का खून गर्मा में ठंडा बना है। इससे इतर हेलीमंडी में नन्हें बच्चों ने अपने मजबूत इरादे का इजहार किया है। बीती सांय हेलीमंडी वार्ड एक के पालिका पार्क में दिन ढ़ले खेलने वाले नन्हें बच्चों ने अपना खेल और मस्ती को दरकिनारे करते हुए नक्सली हमले में शहीद 25 जवानों के सामुहिक चित्र, अंतिम संस्कार सहित परिवार के चित्र हाथों में लेकर मोमबत्ती जलाकर अपने ही अंदाज में नमन करके श्रद्धाजंली अर्पित की।
इसी दौरान पार्क में सायं की सैर सहित घूमने के लिए आए हुए लोगों सहित अभिभावकों ने जब नन्हें बच्चों के हाथों में जलती मोमबत्तियों सहित सैनिकों के चित्र भी देखे तो वे स्वयं को नहीं रोक सके और बच्चों का हौंसला बढ़ाने के लिए आसपास आ गए। शिव कुमार ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते कहा कि, देश के प्रति लगाव और कुछ करने का जुनून स्वभाविक-कुदरती देन होती है, जो कि इन नन्हें बच्चों में साफ-साफ दिखाई दे रही है। सरकारी से लेकर महंगे प्राइवेट स्कूलों में पढऩे वाले इन नन्हें बच्चों के अभिभावक दैनिक मजदूरी करने वालों से लेकर, पुलिस विभाग, सुरक्षा बलों सहित अन्य संस्थानों में कार्यरत हैं। इन नन्हें बच्चों को जोश सहित जुनून उस वक्त दिखाई दिया, जब सभी ने मिलकर भारत माता की जय, वंदे मात्रम, तिरंगा हमारी शान-तिरंगा हमारी जान जैसे नारे भी लगाए।
इन बच्चों ने दी शहीदों को श्रद्धाजंली
लक्षित, देवा, लोकेश, सिद्धार्थ, तिलक, लव कुमार, सागर, अमन, दीपांशु, मनीष, गोपाल, कुणाल, विवेक, श£ोक कुमार, युवराज, तन्नू, आशुतोष, सावन, अंशूल, कानन, रीना, दीपा, हीना, मानवी, राखी, वियाशी, विक्की, पीहू, नवीन, मुकुल, रितिक, यश कुमार, आकाश, देवू, मोनी, विकास, अक्कू, नैतिक व अन्य बच्चे भी शामिल थे। इन सभी बच्चों ने शहीदों सहित इनकी शहादत को नमन करते हुए अपने हाथों में जलती मोमबत्ती लेकर पार्क की परिक्रमा भी की।
अब गोली का जवाब ‘गोली’
यहां सवाल अपने ही देश में पल रहे देश के दुश्मनों का है, जो विकास, शिक्षा, सुविधा को सहन नहीं कर पा रहे।  कायरों की तरह घात लगाकर, मजबूर लोगों को ढ़ाल बनाकर जवानों पर जान लेवा हमले को और कितना सहन किया जा सकता है। अब ईंट का जवाब पतथर से देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। जवान जागते हैं , विकास होता है और देश चैन की नींद सोता है।  हमारे जवानों को हमले करके एेसे ही मारने का सिलसिला नहीं रोका गया तो नेता, अधिकरी, आम आदमी कैसे चैन की नींद सो सकेगा। महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव का दो टूक कहना है कि, चोर नहीं चोर की मां को ही मार देना हितकर होता है। कब तक शांति की बात की जाए और जवानों के खून से धरती मां लाल होती रहे, अब देश की मांग है कि नक्सली हो या आतंकी हो, इनको जीने का मौका नहीं देना चाहिए। महामंडलेश्वर स्वामी ज्योति गिरि ने सीधे और सरल शब्दों में कहा कि, जो भी कोई जिस भाषा को समझे, उसी भाषा में जवाब जल्दी समझ में आता है।  किराये-भाड़े के हथियारबंद  बिना कसूर की जा रही जवानों की हत्या को कब तक सहन किया जाएगा। एक न एक दिन तो  हालात चाहे कैसे भी बने, जवाबी कार्यवाही तो करनी ही पड़ेगी। देश का बच्चा-बच्चा जब चिल्ला रहा है कि अब और नहीं तो फिर सरकार को भी निर्णायक कार्यवाही में देरी नहीं करनी चाहिए। अपने जवानों की रक्षा करना भी राजा(पीएम-केद्र सरकार) का नैतिक और कानूनी अधिकार भी है।
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