इस साल पड़ेगी भयंकर गर्मी, ये हैं वजह : राकेश सारस्वत

राजस्थान। मेदिनी ज्योतिष में शनि, मंगल और सूर्य को शुष्क ग्रह माना गया है। वही दूसरी ओर चंद्र, शुक्र, बुध और गुरु को जलीय या वर्षा कारक ग्रह माना जाता है। प्राय: यह देखा गया है कि जब अग्नि तत्व की राशियां मेष, सिंह और धनु पर शुष्क ग्रहों शनि, मंगल और सूर्य का प्रभाव अधिक पड़ता है तो उस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ गर्मी रहती है और वर्षा कम होती है। इस साल संजोग से मार्च के महीने के शुरू में ही अग्नि तत्व राशियों मेष, सिंह और धनु में शुष्क ग्रहों का जमावड़ा लग गया। मेष में चल रहे मंगल, सिंह में गोचर कर रहे राहु और धनु में आ चुके शनि इस बार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पडऩे का ज्योतिषीय संकेत दे रहे हैं।
यही वजह है कि साल मार्च के मध्य से ही तापमान में तेजी से वृद्धि दिख रही है। अप्रैल का महीना आते-आते मध्य भारत और पश्चिम भारत तेजी से तपने लगेगा। सिंह राशि के राहु द्वारा पीडि़त होने से गुजरात और विदर्भ में इस बार अधिक गर्मी से पानी की भयंकर किल्लत हो सकती है। खरीफ की फसल संबंधी भविष्यवाणी के लिए वृषभ संक्रांति की कुण्डली पर दृष्टि डालें तो कुछ बुरे संकेत दिखाई देते हैं। सूर्य इस वर्ष 14 मई की रात्रि 11 बजकर 57 मिनट पर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। वृषभ संक्रांति के समय सूर्य और मंगल की युति से तेज गर्मी पडऩे का योग बन रहा है। मई के पहले पखवाड़े में मंगल का रोहिणी नक्षत्र में गोचर और बाद में जून महीने में मंगल का वर्षाकारक आर्द्रा नक्षत्र को पीडि़त करना इस साल मानसून में विलम्ब का ज्योतिषीय योग है। सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय बनने वाली कुंडली भी इस बार मानसून में देरी और वर्षा में कमी का योग बता रही है। सूर्य इस वर्ष 22 जून 2017 को सुबह 5 बज कर 14 मिनट पर वर्षाकारक नक्षत्र आर्द्रा में प्रवेश करने जा रहा है। आर्द्रा प्रवेश की कुंडली में लग्न में शुष्क ग्रह मंगल और सूर्य लग्नेश बुध को पीडि़त कर वर्षा में कमी का योग बना रहे हैं। आषाढ़ के महीने में शनि का वक्री होना तथा मंगल का सूर्य से आगे गोचर करना मेदिनी ज्योतिष के ग्रंथों के अनुसार कम वर्षा का योग होता है। इस वर्ष ऐसे ग्रह योग निर्मित होने के कारण जून और जुलाई में कम वर्षा होगी। केवल 16 जुलाई से 16 अगस्त तक मंगल और सूर्य के जलीय राशि कर्क में गोचर के समय अच्छी वर्षा होगी जिससे किसानों को कुछ राहत मिलेगी। आर्द्रा प्रवेश और वृषभ संक्रांति की कुंडलियों का सम्मलित अध्ययन इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून में केवल 90′ के आसपास वर्षा होने के योग बता रहे हैं..

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