जाटलैंड रोहतक में नमो का आगमन

गुरुग्राम। जाटलैंड रोहतक में नमो का आगमन और प्रस्थान हो चुका है। इसके साथ ही हॉट सीट बने गुरुग्राम विधानसभा से टिकट के लिए दावेदार , अभी से एक – दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के खेल में आपस में और साथ ही बीजेपी संगठन में एकता भी पोल खोलने में जुट गए हैं। सबसे बड़ी हैरानी तो यही है कि, रोहतक वाहनों का काफिला ले जाने के दावेदारों को यही नहीं मालूम कि, जाटलैंड रोहतक में बीजेपी की रैली नहीं, वह पन्ना प्रमुखों का महासम्मेलन आयोजित किया गया था। जिसमें प्रत्येक पन्ना प्रमुख के जिम्मे 15 कार्यकर्ता/सहयोगी साथ लाने की जिम्मेदारी तय की गई थी। बीजेपी गुुरुग्राम से किस को टिकट देकर पार्टी का उम्मीदवार बना चुनावी समर में उतारगी, यह किस्मत का खेल सहित भविष्य के ही गर्भ में हैं। लेकिन टिकट का दावा पार्टी के साथ अन्य कोई भी व्यक्ति, जिसे भरोसा हो वह दावा ठोक सकता है और ऐसा किया भी जा रहा है। बीजेपी टिकट के दावेदार पुराने कार्यकर्ता, पार्टी के पदाधिकारी, एमएलए, नवागत और ताजा भाजपाई बने नेता भी हो सकते हैं। इससे इतर टिकट के दावेदार यह क्यो भूल रहे हैं कि, बीजेपी के ही अन्य संगठन का अन्य कार्यकर्ता भी टिकट का दावेदार हो सकता है या पार्टी ऐसे व्यक्ति को भी उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन जिस प्रकार से बीजेपी के ही एमएलए और मीडिया प्रभारी पर प्रहार किया गया कि, वे रैली में नहीं गए? आरोप लगाने सहित दावा करने वाले नेता, जो कि लोकसभा चुुनाव के बाद अचानक प्रकट हुए उन्हें यहीं नहीं मालूम की रोहतक में बीजेपी की रैली थी ही नहीं, वह केवल और केवल पन्ना प्रमुख महासम्मेलन आयोजित किया गया था। नमो और मनो की जो लहर और बीीजेपी की बयार चल रही है, इसमें कमल का फूल थाम कर चंडीगढ़ पहुंचने का सपना , दावेदारों की नींद गायब किये हुए है। येन-केन-प्रकारेण टिकट हथियाना ही पहला निशाना बना हुआ है। गुरुग्राम से कम से कम दो दर्जन दावेदार कमल को थामने की दौड़ सहित जुगाड़ में जुटे हैं। हालात यह है कि जिस प्रकार से बीजेपी में अन्य दलों के नामी नेताओं की एंट्री हुई और हो रही है, कि टिकट तो लेना ही है। ऐसे नेताओं की एंट्री से जानकारों के मुताबिक बीजेपी स्वयं ही टिकट के दावेदारों के कारण ओवर वेट होती जा रही है। टिकट तो किसी एक को , चाहे कोई भी पुराना एमएलए, आम कार्यकर्ता अथवा बीजेपी के लिए और भी अधिक हैवीवेट उम्मीदवार हो उसे ही दिया जाना तय है। अब लाख टके का सवाल यही है कि, आज जितने भी बीजेपी की टिकट अथवा कमल को थामने वाले दावेदार हैं, टिकट नहीं मिलने पर क्या अपने मन की बात और इच्छा को पूरा करने के लिए चुनाव (किसी और पार्टी या स्वतंत्र) नहीं लडन$े का भी संकल्प लिये हुए हैं। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि, कौन और कितना बीजेपी, मनो और नमो के प्रति समर्पित रह सकेगा। फिल हाल तो गुरुग्राम से कमल के जितने भी दावेदार हैं, टिकट अपनी जेब में ही मानकर समर्थकों का पसीना और अपना पैसा पानी की तरह से बहाने में कोई कंजूसी नहीं बरत रहे हैं।

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