नव वर्ष की रात्री में मसिहा बनकर पहुंची जापानी महिला

गुरुग्राम। एक जनवरी की मध्य रात्री में एक तरफ जहां साइबर सिटी, देश सहित दुनिया भर में लोग अपनी ही मस्ती में मदिरा और म्यूजिक की धुनों पर थिरकते हुए जश्न में डूबे थे। एसे में साइबर सिटी में एक विदेशी जापानी महिला आलीशान होटल, पब और बार सहित शहर की सड$कों पर ऐसे बेधर, गरीब, बेबस और लाचार लोगों को हाड जमा देने वाली ठंड के बीच खुले आसमान के नीचे देखकर सिहर गई। बेशक इस जापानी महिला ने सर्दी से बचने के लिए स्वयं गर्म वस्त्र पहने थे, लेकिन सड$क किनारे और फुटपाथ पर ठंड में सिकुड़े और एक-दूसरे से चिपके (मां-बच्चे) लोगों को देखा तो वह भी विचलित हो गई।
टोक्यो (जापान) में पिछले 15 वर्षों से रह रही, चकाचौंध और मस्ती में डूबी साइबर सिटी में पहुंची और यहां पर सड$क/फुटपाथ पर बेधरों को ठिठुरते देखा तो, भारतीय मूल की जापानी महिला नुपूर ने बिना समय गवाये अपने सहयोगियों के साथ में मस्ती में डूबी सिटी और मदमस्त लोगों से इतर शहर में विभिन्न स्थानों पर घूम-घूम कर सड$को/फुटपाथों पर खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में काँप रहे बुजुुर्गो, महिलाओ और बच्चों को ढूंढ-ढूंढ सर्दी से बचने के लिए गरम कंबल बांटने शुरु कर दिये।
नूपुर तिवारी जो की एक भारतीय मूल की महिला है और जापान में पिछले 15 वर्षों से रह रही है और वहां पर योग व मैडिटेशन मुफ्त सिखाती है । इन दिनों भारत के दौरे पर आई हुई है। हील टोक्यो के नाम से एक सामाजिक संथा चला रही नूपुर योग और मैडिटेशन से जो डोनेशन प्राप्त होती है, उससे निर्धन लोगों, विशेषकर बच्चों को, भारत में मुफ्त शिक्षा देतीं है।
31 दिसंबर-एक जनवरी की बर्फीली रात में नूपुर 11 बजे से ले कर 2.30 बजे तक अपने कुछ युवा वालंटियर्स के साथ पूरे गुरुग्राम में घूमती रही और कड़ाके की ठंड में सडको के किनारे खुले आसमान के नीचे सिकुड़ रहे लोगों ढूंढ रही थी। सहयोगी वालंटियर्स 24-28 की उम्र के थे व सोसिओ मोटो नामक संस्था से थे। नुपूर के लिए यह एक दर्दनाक/पीड़ावाला मंजर था कि एक तरफ दुनिया नव वर्ष के आगमन की खुशियां मना रही थी और बार व होटलों में थिरक रही थी। ऐसे ही शहर में एक ऐसा तबका भी था जो खुले आसमान के नीचे सड$कों के किनारों पर कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहा था । नुपूर के शब्दों में , मैं अपने साथियों के साथ दिसंबर 31 की रात इन बेघरों को कम्बल बाटने के लिए शहर में निकल आये। मेरे साथ निखिल, सिमरप्रीत सहित और भी साथी थे । जिन्होंने डिस्को व होटल जाने की बजाय मेरे साथ सड$क पर बिताना उचित समझा। नुपूर के शब्दों में उसके लिए इससे बेहतर नर्व वर्ष का जश्न हो ही नहीं सकता था, जो खुशी और मन को सुकूल मिला इसे बयान नहीं किया जा सकता। नूपुर तिवारी जोकि हील टोक्यो की इंडियन इकाई हील इंडिया को शुरू करने जा रही है गुडगाँव के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, शीतला माता मंदिर के आस पास व् अन्य स्थानों जैसे फ्लाईओवर के नीचे सो रहे बेघरों को कम्बल बाँटे.सोसिओ मोटो संस्था के निखिल ने बताया की सब्जी अधिक दुर्दशा थी ठण्ड से कांप रहे बच्चों, महिलाओ व् बु?ुर्गों की और कुछ के पास तो सिर्फ पतली सी चादर भी नसीब नहीं थी और वे मध्य रात्रि ठण्ड में कांप रहे थे.

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