कार्रवाही के नाम पर प्रशासन की ‘कुंडली’

गुरुग्राम। सबसे इमानदार और अपने बेदाग राजनीतिक सफर के मिसाल की पहचान वाले केंद्र में मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के ही राजनीतिक गढ़ पटौदी हलके की हेलीमंडी नगर पालिका में ‘कथित अग्रसेन भवन की जमीन’ का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है। आरटीआई कार्यकर्ता मुकेश गुप्ता के साथ में हेलीमंडी पालिका के पूर्व चेयरमैन जगदीश सिंह, भारतीय किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष मास्टर ओम सिंह चौहान ने कहा है कि, सूचना के अधिकार के तहत पालिका प्रशासन के द्वारा उपलब्ध कराये गए दस्तावेजों के आधार पर सीएम विंडों पर की गई शिकायत की एवज में पालिका अधिकारी के द्वारा नियमों के विरूद्ध काम की रिपार्ट पर प्रशासन आरोपियों पर कार्रवाही न करके रिपोर्ट पर ही कुंडली मारे बैठा है। नियमानुसार सीएम विंड़ो पर शिकायत का 30 दिनों में निपटारा करके सीएमओ को रिपोर्ट करनी होती है। लेकिन यहां पर संबंधित फाइल मौजूदा पालिका सचिव की रिपोर्ट के तीन माह बाद भी कथित राजनीतिक दवाब के कारण एसडीएम आफिस में ही दबा कर रखी हुई है। मुकेश के मुताबिक बार-बार कार्यवाही सहित अन्य जानकारी मांगने पर कोई संतोष जनक जवाब नहीं दिया जा रहा।बनाना था शापिंग काम्लेक्स
हेलीमंडी में केनरा बैंक और दी सैंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के सामने/बराबर में हेलीमंडी पालिका के द्वारा कुछ वर्ष पहले शापिंग काम्लेक्स बनाने सहित इसके लिए आर्किटेक्ट और कंसलटेंट अंगेज करने का प्रस्ताव पास किया गया। रविवार को हेलीमंडी-जाटौली के ओम सिंह चौहान, राज सिंह चौैहान, कप्तान जनक सिंह, अमित कुमार, राम किशन रेवाडिय़ा, सरेंद्र सिंह सहित अन्य ने पत्रकारों के सामने हेलीमंडी पालिका के दस्जावेज प्रस्तुत करते आरोप लगाया कि, ‘शापिंग काम्लेक्स’ की प्रस्तावित जमीन में से 18 सौ गज के विपरीत 24 सौ पर महाराजा अग्रसेन भवन बनाने पर पूर्व चेयरमैन सहित पूर्व सचिव में मुहर लगा अनुमोदन के लिए डीसी के पास भेज दिया। डीसी ने आब्जेक्शन लगाकर विस्तृत रपट सहित मालिकाना हक की जानकारी तलब की। लेकिन यहां भी डीसी को गुमराह करके 24 सौ गज जमीन पर निर्माण के लिए मंजूरी ले ली गई।25 सामुदायिक भवन/धर्मशाला
आरटीआई कार्यकर्मा मुकेश रूस्तगी ने मामले के दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए सवाल किया कि, हेलीमंडी/जाटौली क्षेत्र में आबादी करीब 25 हजार है। यहां पर पहले से ही करीब 25 विभिन्न धर्मशालाएं/सामुदायिक भवन बने हुए हैं। औसतन 8 सौ की आबादी पर एक धर्मशाला/सामुदायिक भवन पहले से ही मौजूद हैं। ऐसे में समुदाय विशेष(जिससे वह स्वयं भी हैं) के नाम पर पालिका अधिकारी/चेयरमैन के द्वारा अनुमोदन करना, समाज में फूट डालने और बांटने की मानसिकता के साथ-साथ राजनीतिक स्वार्थ को भी साबित करता है। ‘ अग्रसेन भवन बनाने’ की कार्रवाही आरंभ होने के बाद में पालिका प्रशासन के पास रोहिल्ला , राजपूत, ब्राहमण और सैनी समाज के भवन बनवाने के भी आवेदन किये गए। यह भी कथित आरोप लगाया कि, यहीं पर ही शहीद स्मारक बनाने के इंकार कर दिया गया। मौजूदा ‘अग्रसेन भवन निर्माणाधीन’ के लिए अनुचित तरीके से 22 लाख रूपए भी खर्च किये जा चुके हैं।

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