कर्म से ही सार्थक होता है जन्म दिवस का महत्व : ज्योति गिरि

गुरुग्राम। कर्म से ही इंसान का जन्म दिसव सार्थकत होता है। जन्म दिवस मनुष्य के जीवन में एक यादगार दिन और चाहने वालों के लिए लम्हा होता है। वास्तव में प्रत्येक जन्म दिवस पर भगवान के द्वारा निश्चित की गई मनुष्य की आयु में से उसकी उम्र का एक कीमती वर्ष कम हो जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमें जीवन में ऐसा संकल्प करना चाहिए, जिससे सभी मनुष्य प्रति दिन अच्छा और सकारात्मक ही सोचे और समाज हित में अच्छा-अनुकरणीय कार्य ही करें। यह उन हालात में संबंधित व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, जो कि किसी संस्था का, समाज का, संगठन का , संस्थान का प्रतिनिधित्व करता हो। मिलने वाला स्नेह, दुआ और आशिर्वाद सभी के लिए अनमोल होता है। यह बात श्री महाकालेश्वर कल्याण ट्रस्ट,महाकाल संस्थान के अधिष्ठाता और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी ज्योति गिरि महाराज ने अपने ५२वें जन्मोत्सव के मौके पर सबसे बड़े गांव बोहड़ाकला में श्री प्राचीन हनुमान मंदिर परिसर में श्री रामलला मंदिर अयोध्या भव्य निर्माण के निमिम आयोजित त्रि-दिवसीय महारुद्र यज्ञ के अंतिम दिन यज्ञ में पूर्णाहूति अर्पित करने के उपरांत जन्म दिवस की व्याख्या करते हुए कही।

कृत्य अनुयायिआ को नई प्रेरणा प्रदान करें
स्वामी ज्योति गिरि ने कहा कि, बच्चों के जन्म दिवस मनाने का अभिभावकों में अलग ही उत्साह होता है। जब समाज में प्रतिष्ठित लोगों के भी जन्म दिवस मनाये जाता हैं तो सीधा और सरल अर्थ है कि च्आपके कृत्य अनुयायिआें के साथ ही श्रद्घालुआें को नई प्रेरणा प्रदान करेंज्। उन्होंने कहा कि च्जन्म और मरणज् के लिए परमपिता परमेश्वर ने सभी के लिए पहले से ही स्थान निश्चित किया हुआ है। लेकिन जैसे-जैसे मनुष्य की आयु बढ़ती है, उसकी शिक्षा, स्वभाव, संस्कार सहित सोच विचार में भी समय के अनुसार बदलाव आते रहते हैं। इन्हीं में से ही सबसे महत्वपूर्ण है च्अनुभवज् जो कि किसी भी शिक्षण संस्थान में किसी के द्वारा नहीं दिये जा सकते और ग्रहण करना भी संभव नहीं है। अनुभव ही मनुष्य को परिपक्व भी बनाते है और सही निर्णक के लिए प्रेरणा देते हैं।

जन्म से अधिक कर्म ही प्रधान
स्वामी ज्योति गिरि ने कहा कि जननी अर्थात मां जन्म देती है। कहा भी गया है कि मात-पिता जन्म तक के भागीदार हो सकते हैं। पालन-पोषण के साथ ही मनुष्य को उम्र बढऩे के साथ अपने जीवन की दिशा और दशा तय करनी होती है। इन्हीं के बीच वह मौका भी आता है जब मनुष्य किन्ही न किन्ही कारणों और अंर्तमन की प्रेरणा से समाज के लिए भी प्रेरणा और मार्गदर्शक बन जाता है। मनुष्य के द्वारा जीवन में किये गए कार्यो और कर्म के कारण ही युगांतर तक याद किये जाते हैं, कर्म ही मनुष्य के कुल को भी गौरवान्वित करते हैं, मात-पिता सहित गुरु को भी अपने साथ ही अमरत्व प्रदान करते हैं। उन्होने कहा कि, जन्म चाहे कैसे और कहीं भी लिया हो, लेकिन महाप्रयाण से पूर्व एेसे कर्म जीवन में अवश्य करने चाहिये कि,आपके कर्म के अनुयायी कर्मो को समाज हित में आगे बढ़ाते रहें।

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