देशभक्ति, सादगी-सेवा-त्याग के अप्रतिम व्यक्तित्व से संपन्न थे डॉ. राजेंद्र प्रसाद : जीएल शर्मा

गुरुग्राम। भारत के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 134वीं जन्मजयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हरियाणा डेयरी प्रसंघ के चेयरमैन जीएल शर्मा ने उन्हें भारत माता का सच्चा सपूत बताया। वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि राजेंद्र प्रसाद अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी और सादगी के प्रतिमूर्ति थे। कुशाग्र बुद्धि के धनी डॉ. राजेंद्र प्रसाद की देश भक्ति वर्तमान में युवाओं के लिए प्रेरणा-स्त्रोत है। यहां ताऊ देवीलाल स्टेडियम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के उपलक्ष्य में पूर्वांचल समाज द्वारा आयोजित समारोह में जीएल शर्मा ने शिरकत की। इस दौरान संस्था की तरफ से उन्हें सम्मानित किया गया। जीएल शर्मा ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद एकमात्र ऐसे विद्यार्थी थे जिनकी परीक्षा उत्तर पुस्तिका जांच के बाद उस पर एग्जामिनर ने अपनी टिप्पणी में लिखा कि ‘परीक्षार्थी परीक्षक से बेहतर है। 18 साल की उम्र में 1902 में कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया। वे अत्यंत मेघावी व कुशाग्र बुद्धि के धनी थे। एकबार जो पढ़ लेते थे वह उन्हें कंठस्थ हो जाता था। सादगी, सरलता और स्वाभाविकता उनके व्यक्तित्व में थी। अपनी देशभक्ति, सादगी, सेवा, त्याग गुणों के चलते डॉ. राजेंद्र प्रसाद आज भी प्रसांगिक हैं। जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें बार-बार नमन करता है। इस मौके पर जीएल शर्मा ने पूर्वांचल समाज के लोगों का धन्यवाद किया कि वे समग्र रूप में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को याद करते हैं, जिससे कि हमारी युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *