गौशाला में मौजूद गायों को सँभालने के लिए लगभग हर माह आते हैं अमेरिका से गुरुग्राम

गुरूग्राम। मेवात के संघेल स्थित श्री चेतन दास गौसंवर्धन संस्थान को स्वावलम्बी बनाने के लिए बनाई जाती है पंचगव्य सामग्री
धूप, समिधा और लोग ( गोबर की लकड़ी ) बेचकर हुए कमाई लगती है गौशाला में
अधिकांश समय अमेरिका में बिताने वाले एक एनआरआई ने मेवात की गौशाला की तकदीर और तस्वीर बदल कर रख दी है। अपने देश में आज भी जब लोग दूध न देने वाली गायों को सडक़ों पर छोडऩे से नहीं हिचकिचाते तो ऐसे में यह विश्वास करना भी मुश्किल हो जाता है कि एक शख्स केवल गायों के लिए लगभग हर माह अमेरिका से स्वदेश आता है। जी हाँ, प्रमोद राघव ऐसे ही गौभक्त का नाम है, जो अमेरिका में बैठकर भी मेवात की गौशाला में रहने वाली गायों की ना केवल चिंता करते हैं, बल्कि निस्वार्थ भाव से उनके संरक्षण के लिए अनेक कार्य निर्बाध चलाये हुए हैं। मूलरूप से गुरुग्राम के घामडोज गांव के निवासी प्रमोद सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में 1996 में अमेरिका गए और वहां एक सफल व्यवसायी के रूप में स्थापित हुए, लेकिन अपने वतन के लिए कुछ करने का जूनून उनमें इस कदर सवार है कि उन्होंने गुरुग्राम में अनेक सामाजिक प्रकल्प शुरू करने के साथ साथ गौशाला का भी बीड़ा उठाया। अब गौसेवा का यही जूनून उन्हें लगभग हर माह गुरुग्राम और मेवात आने को प्रेरित करता है। उनकी इसी भावना को देखकर मेवात के संगेल स्थित से भी अधिक गायों वाली ( गौशाला) श्री चेतनदास गौ संवर्धन संस्थान समिति ने उन्हें अपना अध्यक्ष भी चुना हुआ है।
प्रमोद की गौसंरक्षण के प्रति भावना का आंकलन इस बात से ही लगाया जा सकता है कि ३० एकड़ में फैली श्री चेतन दास गौ संवर्धन संस्थान में लगे दो दर्जन सीसीटीवी कैमरा लगवाएं गए हैं और अपने मोबाइल के जरिये अमेरिका बैठकर भी ये ध्यान रखते हैं कि गौशाला में कब किस चीज की जरुरत है। लगभग डेढ़ साल पहले इस गऊशालालगभग 1500 गाय थी, उनके लिए भी सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज गऊशाला में 4200 से भी अधिक गाय हैं, जिनका संरक्षण सही से हो पा रहा है। कुछ दिन पहले अमेरिका से भारत गौशाला देखने पहुंचे प्रमोद राघव ने लोगों को सीधे गौशाला से जोडऩे और गौसंरक्षण के लिए मुहीम चलाई है , जिससे ना केवल कुछ बेरोजगारों को रोजगार मिला है बल्कि मेवात की गौशाला को स्वावलम्बी बनाने की तरफ बड़ा कदम है। प्रमोद की भूमिका इसलिए भी ज्यादा सराहनीय हो जाती है क्योंकि मेवात में गायों की स्थिति अन्य जगह से बदतर ही रही है।
प्रमोद राघव ने बताया कि गौ संरक्षण के लिए पंचगव्य से निर्मित धूप, हवन समिधा, फिनाइल, वर्मी कम्पोस्ड आदि उत्पाद तैयार किये जा रहें हैं, जो केमिकल रहित है। इनकी बिक्री से लाभ के रूप में प्राप्त होने वाली राशि मेवात के संगेल में स्थित श्री चेतन दास गौ संवर्धन संस्थान में गौ हत्या से बचाकर लाई गई बीमार व अपाहिज गायों के इलाज व गौशाला के उत्थान के कार्यों में लगाई जाती है। अब तक 30 एकड़ में फैली इस गौशाला में काफी मूलभूत सुधार करने में सफलता भी मिली है। जिसमें लगभग पांच एकड़ में नये शेड, बीमार गायों के लिए डॉक्टरों की टीम का प्रबंध, दवाइयों का प्रबंध, बछड़े-बछडियां, नंदी, दुधारू और दूध ना देने वाली गायों का वर्गीकरण कर उनके सुविधाजनक बैठने या घूमने के प्रबंध तथा गौमाता की मौत के बाद उनके विधिवत रूप से दाह संस्कार के लिए जेसीबी एवं अन्य साधनों का प्रबंध शामिल है।
गुरुग्राम के घरों तक पहुंच रहा है मेवात की गायों का दूध यह प्रमोद राघव की गायों और गौशालाओं के लिए किये गए काम का ही नतीजा है कि मेवात की इस गौशाला की देशी गायों का दूध गुरुग्राम तक रोज़ाना सप्लाई हो रहा है। प्रमोद के मुताबिक 200 घरों में रोज़ाना दूध पहुंचाया जा रहा है। हर माह 100 नए लोगों को गौशाला से जोडऩे का अभियान ज्यादा से ज्यादा लोग गौ संरक्षण अभियान से जुड़ सके, इसके लिए ईसीएस सुविधा से लोगों और गौशाला को सीधे जोड़ा जा रहा है। इसके तहत एक अभियान चलाया हुआ है, जिसके तहत हर माह कम से कम १०० लोगों को गौशाला का सदस्य बनाया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *