श्रीमद्भागवत कथा से भक्त जाने भगवान जब धरा से चले गए तब धर्म किस की शरण मेंं गया : व्यासपीठाधीश्वर आचार्य संतोष जी महाराज

फरीदाबाद। सेक्टर-30 में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठाधीश्वर आचार्य संतोष जी महाराज ने किन-किन प्रसंगों की कथा सुनाई। व्यास जी ने श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत वेदव्यास कृत मंगलाचरण, सूत कृत मंगलाचरण और सुखदेव कृत मंगलाचरण की कथा सुनाई।
व्यासपीठाधीश्वर आचार्य संतोष जी महाराज ने बताया कि हमारे जीवन में मात्रपूर्ण भूमिका मंगलाचरण की है। मंगल हैं चरण जिन के, मंगल हैं आचरण जिनका ऐसे भगवान श्री हरि को स्मरण ही मंगलाचरण है। इसलिए प्रत्येक प्राणी को मंगलाचरण करना चाहिए। मंगलाचरण का श्लोक या स्मरेत पूंडरीकाक्ष स: बाह्यब्रान्तरासुचि। जो भगवान का स्मरण करेगा वही बाहर और भीतर से पवित्र होगा। इसी क्रम में सूत सौनक संवाद, सौनक जी के छह प्रश्र जीवन का श्रेय क्या है। शास्त्र का सार क्या है। भगवान के अवरात का प्रायोजन क्या है। भगवान के कितने अवतार है। भगवान ने द्वापर में कौन-कौन से लीलाएं किस लिये की थी और द्वापर की लीला स्मरण करके जब भगवान धरा से चले गए तो धर्म किस की शरण में गया। इन्हीं छह प्रश्रों से भागवत का शुभारंभ होता है। इसी क्रम में सृष्टि की चर्चा सूत द्वारा इन्हीं प्रश्रों का उत्तर बाराह अवतार महाराज मनुसतरूपा, प्रसंग देवहूति करदम संवाद आदि प्रसंगों की कथा सुनाई।

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