शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं सामाजिक, नैतिक मूल्य भी जरूरी: पी. राघवेंद्रा

गुरुग्राम। रसायन और तेल रसायन मंत्रालय दिल्ली सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी पी. राघवेंद्रा राव ने कहा कि शिक्षा का मतलब केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि सामाजिक, नैतिक मूल्य के साथ बच्चों को समाज में बेहतर इंसान भी बनाना है। इसके लिए शैक्षणिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों की बड़ी जिम्मेदारी बनती है। घर में माता-पिता और स्कूल-कालेज में शिक्षकों का यह दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ उनके काम आने वाले हर ज्ञान को उनसे सांझा करें। यह बात उन्होंने सेक्टर-9 स्थित ग्रीनवुड पब्लिक स्कूल के वार्षिकोत्सव समारोह में कही। यह समारोह बोहड़ाकलां स्थित ब्रह्मकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में मनाया गया। पी. राघवेंद्रा ने शिक्षकों, परिजनों से यह भी कहा कि पांच साल से लेकर 18 साल तक बच्चे की गोल्डन ऐज होती है। इस अंतराल में उनका खास ध्यान रखा जाना चाहिए। यह एक तरह से कैरियर बनाने का पीरियड होता है। हमें बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और सामाजिक मूल्यों पर भी फोकस करना चाहिए। चाहे बेटा हो या बेटी, उन्हें हर उस चीज का ज्ञान कराएं, जो कि अच्छी और बुरी है। क्योंकि आज के बच्चे ही कल के नागरिक हैं। ऐसे नागरिक, जिनके कंधों पर देश का भार होगा। उन्होंने कहा कि सकारात्मक चीजों को ग्रहण करें और नकारात्मक का त्याग करें। तभी हम खुद को बेहतर बना सकते हैं। कर्म पर अपना फोकस करें न कि जीत पर। अगर कर्म सही करेंगें तो जीत निश्चित है। इससे पूर्व कार्यक्रम में रसायन और तेल रसायन मंत्रालय दिल्ली सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी पी. राघवेंद्रा राव का यहां भव्य स्वागत किया गया। स्कूल की प्रबंधिका श्रीमती सरिता कुमार, प्रधानाचार्या श्रीमती ज्योति शर्मा ने अतिथियों व अभिभावकों का स्वागत किया। स्कूल की निदेशिका श्रीमती पुष्पा, सुरेश कुमार व राणा जी के साथ डा. सुधीर कुमार, महेश गुप्ता, मानव आवाज संस्था के संयोजक एडवोकेट अभय जैन समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित हुए। स्कूल के बच्चों ने इस अवसर पर वसुधैव कुटुम्बकम विषय पर कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वसुधैव कुटुम्बकम यानी सारी दुनिया एक परिवार है। इसी परिवार को एक सूत्र में पिरोकर, इनकी संस्कृतियों को गीत, संगीत, नृत्य और नाटक रूपी माला में पिरोकर जब मंच पर प्रदर्शित किया तो हर कोई देखता ही रह गया। दर्शकों को घंटों तक बांध रखने वाला ऐसा कार्यक्रम शायद ही पहले किसी ने देखा हो। यह अपने आप में अनूठा प्रयोग था। इसे किसी प्रोफेशनल कलाकार ने नहीं बल्कि स्कूल के बच्चों ने ही कलात्मक रूप देकर बेहतर ढंग से पेश किया। यहां हर एक कार्यक्रम एक-दूसरे से जुड़ा था। बिना किसी ब्रेक के लगातार यहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए। कार्यक्रम का थीम वसुधैव कुटुम्बम था, इसलिए उसे पूरे विश्व को एक परिवार की तरह दिखाया गया। यहां एलियंस को भी दिखाया गया तो, साऊथ अफ्रीका में जिस तरह से तख्ता पलट हुआ, उसे भी दिखाया गया। यहां ईबोला नामक वायरस को लेकर भी दिखाया गया कि कैसे साऊथ अफ्रीका से चली इस बीमारी ने दुनियाभर में डर पैदा किया है। कार्यक्रम में आगे स्कॉटलैंड के किंग की कहानी को भी यहां नाटक के माध्यम से दिखाया, जिसमें यह संदेश दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में हमें मानव से दानव नहीं बनना चाहिए। क्योंकि जब दानवता जागृत होती है तो मानवता खत्म हो जाती है। यहां चीन की संस्कृति को भी दिखाया गया। कार्यक्रम में योग की पद्धति के साथ-साथ ध्यान लगाना भी बताया गया। पिछले दिनों चीन में फंसे बच्चों को निकाले जाने के मिशन को यहां स्किट के माध्यम से दिखाया गया। इसके साथ ही भारतीय नृत्यों की भी धूम रही। यहां गुजरात का गरबा नृत्य भी नजर आया तो पंजाब का भंगड़ा भी, भरत नाट्यम, असमिया नृत्य और भी बहुत कुछ। रंग-बिरंगे परिधानों में सज-धजकर छात्र-छात्राओं ने हर एक कार्यक्रम को जीवंत रूप में पेश किया। अतिथियों ने इन कार्यक्रमों की खुलकर तारीफ की। मुख्याध्यापिका श्रीमती तरंग ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद किया और अंत में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।

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