नारी की नाक काटने से होती है नहीं नाक ऊंची

गुरुग्राम। शहर में रामलीलाएं अंतिम चरण में हैं। कलाकारों द्वारा लीला में बेहतरीन अभिनय करके विशेष छाप छोड़ी जा रही है। कई कलाकारों के किरदार इतने अहम और दमदार हैं कि उनको देखने के लिए लोग कई दिन से इंतजार कर रहे हैं। ऐसा ही यहां जैकबपुरा की श्रीदुर्गा रामलीला में देखने को मिला। यहां के रावण का किरदार निभा रहे कमेटी के प्रधान बनवारी लाल सैनी जब रावण के गैटअप में मंच पर आए तो तालियों, सीटियों से दर्शकों ने स्वागत किया।
रामलीला के आठवें दिन की लीला में रावण का भव्य दरबार के साथ लीला शुरू की गई। रावण दरबार में आते हैं और मनोरंजन का आनंद लेते हैं। इसी बीच खर-दूषण के मारे जाने की खबर शूर्पणखा ने लंकापति रावण (बनवारी लाल सैनी) तक जाकर पहुंचाई। अपनी कटी नाक का बदला लेने के लिए रावण को उकसाया। रावण ने पूछा कि किसने तेरी नाक काटी है। वह बोली, अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र हैं। उसके साथ एक सुंदर स्त्री भी है। उससे सुंदर स्त्री आज तक नहीं देखी। उन्हीं के छोटे भाई ने मेरी नाक काटी है। खर दूषण सहायता के लिए गए तो उन्हें भी मार डाला। इस पर रावण ने कहा-
गम नाथ ना हो मैं उनकी भी नाक अब नहीं रखूंगा,
भेजा नाखूनों के रहा करूं, मिर्चों का नाश उन्हें दूंगा।
नारी की नाक काटने से होती है नहीं नाक ऊंची,
अबला पर हाथ उठाने से जमती है नहीं धाक ऊंची।
मैं चला नाक की सीध उन्हें नाके पर पकडूंगा,
तेरी आंखों के आगे मैं उनकी नाक रगड़ दूंगा।
रावण ने सोचा कि खर और दूषण भी बलशाली थे। उन्हें किसी भगवान के अलावा कोई नहीं मार सकता। मन ही मन में रावण सोचता है कि-निश्चय ही वो अवतारी है तो उनसे बैर रखूूंगा मैं। रावण अपनी बहन की कटी नाक का बदला लेने के लिए एक योजना बना चुके हैं। वे अपने मामा मारिच (सुरेश सहरावत) के पास जाते हैं। मारिच को वे कहते हैं कि वह सोने का मृग बनके चित्रकूट पर विचरण करे और राम-लक्ष्मण को वहां से दूर जाने पर विवश करे। मारिच बोले-
कूदकर अग्नि में फिर बचने का कोई बहाना ही नहीं,
राम के बैरी को इस दुनिया में ठिकाना ही नहीं।
लाके धोखे में मिटाया जा रहा है आपको,
नाश के पथ पर चलाया जा रहा है आपको।
मारिच की बातों को अनसुना करके रावण मारिच से कहता है कि जल्दी से निर्णय ले ले, अगर सोने का मृग बनना है तो सही है नहीं तो अभी उसका वध कर देगा। डर के मारे मारिच रावण की बात को मानकर सोने का मृग बनकर उस स्थान की ओर चला जाता है, जहां पर राम, सीता, लक्ष्मण रह रहे थे। मृत को देखते ही सीता जी का मन ललचाया और उन्होंने राम से वह मृग पकडक़र लाने को कहा। राम ने बहुत समझाया मगर सीता नहीं मानी। इस पर राम उस मृग को पकडन$े को चल दिए। मृग राम के आगे-आगे बहुत दूर तक निकल गया और फिर आवाज आई भैया लक्ष्मण बचाओ, भैया लक्ष्मण बचाओ। इस आवाज को सुनकर सीता ने लक्ष्मण से कहा कि यह तो तुम्हारे भैया की आवाज है। निश्चय ही वे किसी संकट में हैं। इस पर लक्ष्मण ने जवाब दिया, ऐसी कोई बात नहीं है। बहुत कहने के बाद लक्ष्मण जाने को तैयार हुआ और सीता के चारों ओर लक्ष्मण रेखा खींच गए। लक्ष्मण के जाने के बाद रावण साधू के भेष में वहां आते हैं और नाचते हुए सीता जी से भीक्षा मांगते हुए कहते हैं-
ऐ माई मुझको भिक्षा दे, मर्तबा बुलंद हो तेरा,
भगवान तुझे जीता रखे, हो सदा ही भला तेरा।
तुम दूधो नहाओ पूतो फलो, दिन पर दिन बड़भागिन हो,
जोगी को थोड़ा भोजन दे, देवी तू अटल सुहागिन हो।
सीता जब उन्हें भिक्षा देता है तो बीच में लक्ष्मण रेखा तो परेशानी हो जाती है। इस पर रावण कहते हैं कि वे बंधी हुई भिक्षा नहीं लेते। इसलिए बाहर आकर भिक्षा दें। न चाहते हुए भी सीता मजबूर होकर लक्ष्मण रेखा पार कर गई और फिर रावण ने उनका हरण कर लिया। सीता हरण का दृश्य यहां बेहतरी से दिखाया गया। पुष्पक विमान के रूप में एक विमान यहां तैयार कराया गया। उस विमान में सीता को बिठाकर रावण लंका ले गया। कमेटी का यह एक अनूठा सफल प्रयोग रहा। सीता हरण को देखने के लिए रामलीला में सामान्य दिनों से दुगुनी भीड़ थी। इसके बाद वन से जब राम और लक्ष्मण वापस पहुंचे तो देखा कि सीता वहां नहीं थी। व्याकुल राम और लक्ष्मण ने सीता को खूब ढूंगा, लेकिन नहीं मिली। रास्ते में उन्हें घायल जटायु मिला तो पता चला कि सीता जी का रावण अपहरण करके ले गया है। इसके बाद वे आगे चले और रास्ते में शबरी से मुलाकात हुई। श्रीराम द्वारा शबरी के झूठे बेर खाने की भी लीला दिखाई गई।

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