रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने डीआरएम से पूछा, रेलवे रिकार्ड में अब तक क्यों नहीं हुआ गुरुग्राम?

गुडगांव। रेलवे के रिकार्ड में गुड$गांव को गुरुग्राम न किए जाने से सैनिकों और विद्यार्थियों को आरक्षित टिकट लेने में हो रही परेशानी की समस्या को लेकर वार्ड 10 के पूर्व पार्षद मंगत राम बागड़ी व पार्षद शीतल बागड़ी के नेतृत्व में नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन (सीआरबी) अश्वनी लोहानी से मुलाकात की। इसके पूर्व प्रतिनिधिमंडल इसी मांग को लेकर दिल्ली के डीआरएम से भी मिल चुका है। डीआरएम ने भी इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन दिया था। सीआरबी से मुलाकात के दौरान डीआरएम भी मौजूद थे। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को प्रतिनिधिमंडल द्वारा मांग पत्र सौंपे जाने के बाद उन्होंने पढ़ते ही डीआरएम से प्रश्र किया कि आखिर अब तक रेलवे के रिकार्ड में गुड$गांव को गुरुग्राम क्यों नहीं दर्ज किया गया? इस पर डीआरएम ने बताया कि प्रक्रिया लंबी होने के कारण यह काम अभी नहीं हो पाया है। इस पर चेयरमैन ने कहा कि शीघ्र ही रिकार्ड में गुरुग्राम दर्ज किया जाए। मंगत राम बागड़ी और शीतल बागड़ी ने इस पर सीआरबी और डीआरएम को जनता की तरफ से धन्यवाद देते हुए मांग रखी कि सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ विद्यार्थियों की असुविधाओं को देखते हुए रेलवे के रिकार्ड में अति शीघ्र गुरुग्राम दर्ज किया जाए। चेयरमैन को दिए गए मांग पत्र में श्री मंगत राम बागड़ी और शीतल बागड़ी ने उल्लेख किया है कि गुरुग्राम रेलवे स्टेशन वार्ड 10 क्षेत्र में आता है, गुड$गांव गुरु द्रोण की धरती है और भाजपा सरकार द्वारा 13 अप्रैल 2016 को इस आध्यात्मिक आस्था को देखते हुए गुड$गांव का नामकरण गुरुग्राम के नाम से करने का निर्णय लिया था और इसकी घोषणा प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा 27 सितम्बर 2016 को की गई। गृह मंत्रालय भारत सरकार और हरियाणा प्रदेश सरकार द्वारा इसका गजट नोटिफिकेशन भी काफी दिनों पूर्व जारी कर दिया गया है। गुरुग्राम की संस्कृति और सभ्यता के दृष्टिकोण से भाजपा सरकार का यह एक सराहनीय और ऐतिहासिक निर्णय है। लेकिन रेलवे के रिकार्ड में अब तक गुड$गांव को गुरुग्राम नहीं दर्ज किया गया है। जबकि सेना के अधिकारी और सैनिकों को जो टिकट वारंट जारी किया जा रहा है वह गुरुग्राम के नाम से जारी होता है जबकि रेलवे के रिकार्ड में गुड$गांव है। इसके कारण सैनिक जब रेलवे स्टेशन पर टिकट वारंट लेकर पहुंचते हैं तो टिकट बनवाने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं अगर गुरुग्राम के टिकट वारंट पर स्टेशन के कर्मचारियों द्वारा टिकट बना दिया जाता है तो इसका खामियाजा उन्हीं रेल कर्मियों को भुगतना पड़ता है जो टिकट बनाते हैं। रेलवे के रिकार्ड से टिकट वारंट की मैचिंग ना हो पाने के कारण टिकट का पैसा रेलवे काउंटर क्लर्क को ही भरना पड़ता है। यही स्थिति विद्यार्थियों की भी है, विद्यार्थियों को मासिक और अर्धमासिक टिकट के लिए भी जो पत्र जारी किया जाता है उस पर गुरुग्राम अंकित रहता है जबकि रेलवे के रिकार्ड में गुड$गांव है। इसके कारण उन्हें भी परेशानी होती है। प्रतिनिधिमंडल में पीडी शर्मा, सुभाष पाहवा, मूलचंद शर्मा, जगदीश रावत, अनिल उर्फ बाबा आदि शामिल रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *