नगर निगम की हाऊस टैक्स प्रणाली अव्यवस्थित और भ्रष्ट्राचार में संलिप्त : पवन कुमार जैन

गुरूग्राम। नगर निगम के गठन के दस वर्ष बाद भी विभाग की हाऊस टैक्स प्रणाली अव्यवस्थित और भ्रष्ट्राचार में संलिप्त है। विभाग के कर्मचारियों ने आम जनता का काफी मात्रा में रिकार्ड गायब कर दिया है और उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से वरिश्ठ पद से सेवानिवृत्त पवन कुमार जैन ने बताया कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों ने 2013-14 वित्त वर्श में नियमानुसार सैल्फ अस्सेस्मेंट कर अपनी सभी चारों प्रोपर्टीज का हाऊस टैक्स जमा करवा दिया था और साथ ही सभी प्रोपर्टीज के ट्रांसफर के कागज जमा करके नये नाम से दर्ज करा दिए थे एवं नये नाम से हाऊस टैक्स की रसीद भी बनवा ली थी। श्री जैन ने आगे बताया कि 2016-17 वित्त वर्श में निगम विभाग ने उनके द्वारा वर्श 2013-14 में जमा कराई गई राषि की सभी रसीदें और अन्य कागज गायब बताए। वर्श 2016-17 में 25 प्रतिषत स्कीम का फायदा लेने के लिए उन्होनें सभी चारों प्रोपर्टीज की एंट्री दोबारा करवाई और अपना टैक्स दोबारा जमा करवाया। उन्होनें आगे दु:ख प्रकट करते हुए कहा कि अक्टूबर 2017 में चारों प्रोपर्टीज की एंट्री तीसरी बार गलत दर्षाई गई। उन्होनें सभी सम्बन्धित कागज और प्रोपर्टीज की रजिस्ट्रियाँ तीसरी बार 20 अक्टूबर को निगम में जमा करा दिए। 20 दिन बाद भी उनके नगर निगम विभाग के बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के द्वारा उनकी प्रोपर्टीज की एंट्री ठीक नही की गई है।
पवन जैन ने इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री षिकायत सैल, गुरुग्राम नगर निगम आयुक्त और जिला कश्ट निवारण कमेटी में भी षिकायत दर्ज की है परन्तु इसके बावजूद विभाग के कर्मचारियों के कानों पर कोई जू तक नही रेंग रही है।

 

 

 

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