सिंह लग्रे में पैदा बालक होता म्लेच्छ : ज्योतिषाचार्य पं. रामकुमार शास्त्री

ram kumar sharma

बुलंदशहर, 15 फरवरी। जिस जातक या जातिका का जन्म सिंह लग्रे में हुआ हो और उसके सातवें स्थान में शनिचर बैठा हुआ हो, तो उसके परिवार के मुखिया सावधान रहे क्यों कि जातक या जातिका म्लेच्छ बुद्धि का हो सकता है ? यह बात सारस्वत ज्योतिष के ज्योतिषाचार्य पं. राम कुमार शास्त्री ने रामा इन्कलेब मकान नंबर 206 नियर सम्राट होटल के पीछे बुलंदशहर (उत्तरप्रदेश) स्थित कार्यालय पर जातक या जातिका को संबोधित करते हुए कही।
ज्योतिषाचार्य पं. राम कुमार शास्त्री ने कहा कि अक्सर देखो गया है कि सिंह लग्रे में पैदा बालक बोलने में तेज होता है। लगता है कि वह भविष्य के गर्भ में होनाहार होगा। वाणी उसकी यही दर्शाती है। उसके बोलने से और उसके मुख मंडल को देखकर। अन्य जातक या जातिका भयभीत होते हैं यानी डरते हैं कहीं मार न दे।
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि वह बालक अपने भविष्य में कुछ करने की चाहत रखता है, लेकिन ग्रहों का वास होने से उसके झगड़े बढऩे की संभावना बढ़ जाती है। फिर ग्रह झंझटों में फंसाना शुरू कर देती है और फंसने के बावजूद भी वह बालक महाशेर की तरह अपने हक के लिए लड़ता रहता है, लेकिन ग्रह चाल उसकी बदलने से वह सदैव अपने भविष्य को उज्जवल करने में असफल साबित होता है।
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि सिंह लग्रे में पैदा बालक राजा राजा के समान सुख भोगने वाला होता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि वह अपने हक के लिए कई कई बार यतन करता है, लेकिन ग्रहों के प्रभाव के कारण उसकी चाहत अंदर ही अंदर उसे दबाती है। इस सब के बावजूद भी वह महाशेर की भांति उछल उछल कर सामना करता है, लेकिन शुरूआत के समय में भाग्य में जो योग बना होता है उस योग में कष्ट अधिक होने से वह राजा-राजा के समान सुख भोगने से वंचित रह जाता है।
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि माता-पिता कुंडली तो सब को दिखा लेते हैं। कुंडली में जो लिखा होता है वह बात सच्ची होती है। यह एक बार माता-पिता के तय कर लेने से पता नहीं चलती। यह बात जब पता चलती है, जब माता-पिता वृद्ध होते हैं और वृद्धा वस्था में उस बालक के बारे में विद्वानों द्वारा बताए गए भविष्य और कठिनाईयों के बारे में सोचते हैं। तब यह बात सच्ची निकल कर आती हैं। जब वह गहराईयों से सोचते हैं।
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि अगर किसी परिवार के मुखिया के यहां सिंह लग्रे और सातवें घर में शनिचर बैठा हो, तो वह कुंडली अवश्य दिखवा ले और कुंडली में बने योगों के आधार पर चले। ज्योतिषाचार्य ने कहा कि अक्सर माता-पिता कहते हैं कि हमने उपाय करा लिया है। उन्हें सलाह दी जाती है कि आगे के भविष्य के लिए एक बार उपाय कराने से कार्य नहीं चलता है। ज्योतिषाचार्य ने कहा कि जातक या जातिका के बने योग को सफल करने के लिए कई-कई बार उपाय कराने होते है। तब कहीं जाकर जातक या जातिका को उसके योग में सफलता अर्जित होती है। ज्योतिषाचार्य ने कहा कि जो जातक या जातिका के परिवार के मुखिया यह कहते हैं कि हमने उपाय करा लिया है, तो एक बार के उपाय से फल नहीं मिलता है।
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ज्योतिषाचार्य पं. राम कुमार शास्त्री
9719100429

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